स्कूल इंडिया कप के जरिए भारत बनेगा वैश्विक देश

हिन्दी में एक कहावत है, ‘पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब’ जो हम अक्सर बच्चों को सुनाया करते थे, आज से दो दशक पहले हमारे देश के युवाओं पर ये कहावत एकदम फिट बैठती थी। लेकिन आज देश में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं बल्कि खेल की छवि भी बदल रही है। आज देश खेल में उन्नती कर रहा है और ऐसे ऐसे खिलाड़ियों को तैयार कर रहा है जिनके बल पर भारत अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को चैम्पियन की तरह देखने की हिम्मत रखता है।

देश में खेल को बढ़ावा देने की कड़ी में स्कूल स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन स्कूल्स इंडिया कप के जरिए युवाओं को खेल में बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है और इस बात पर अमल कर रहा है कि अब खेल भी उतनी ही जरूरी है, जितनी जरूरी पढ़ाई है।

क्यों भारत में महत्वपूर्ण है स्कूल्स इंडिया कप?

स्कूल स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन के अंतर्गत आयोजित कराए जाने वाली स्कूल्स इंडिया कप की जरूरत इसलिए है क्योंकि एसएसपीएफ मानता है कि देश के हर स्कूल के बच्चे का हक है कि वो स्कूल में खेल पाए। पढ़ाई बेहद आवश्यक है लेकिन जब कोई बच्चा स्कूल के टूर्नामेंट में अपना बेस्ट देकर निकलता है तो फिर उसकी कोशिश रहती है कि वो आगे अपने खेल को सुधारने के लिए उन स्किल्स का इस्तेमाल करें जिसकी दरकार अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बेस्ट खिलाड़ी बनने के लिए होती है।

एसएसपीएफ से जुड़े पूर्व ओलंपियन और एशियन गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट चार्ल्स बोरोमियो का मानना है कि स्कूल्स इंडिया कप उन बच्चों पर ज्यादा ध्यान देता है जिन्हें खेलने में दिलचस्पी है और जो भविष्य में चैम्पियन बनना चाहते है। उन्होंने आगे कहा कि वो खुशनसीब रहे कि उन्हें उनके समय में खेल के साथ साथ पढ़ाई करने का भी मौका मिला क्योंकि पढ़ाई किसी भी छात्र की सोचने समझने की क्षमता को दोगुना कर देता है ताकि वो छात्र एक खिलाड़ी के रूप में खेल के तकनिकों पर और ध्यान दे और उसमें और बेहतर करे।

स्कूल स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन देश के हर छोटे बड़े जिलों में सभी स्कूल स्पोर्ट्स को बढ़वा दे रहा है। भारतीय क्रिकेट के पूर्व तेज गेंदबाज चेतन शर्मा ने उन तमाम खिलाड़ियों को यह सुझाव दिया है जो खेल में ज्यादा दिलचस्पी रखते है वो अपने संपूर्ण विकास के लिए पढ़ाई भी करे और जो पढ़ाई में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं वो खेल को अपने जीवन का हिस्सा बनाए।

तो वहीं प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी धनराज पिल्लै ने भी ये माना कि आज की तारीख में खेल और शिक्षा एक ही सिक्के के दो पहलू है। उन्होंने कहा ‘एजुकेशन के बिना हम अपना खेल ‘एनालाइज नहीं कर सकते। आज अपने एक मैच के रिप्ले एक्शन को देखकर ये समझना बेहद जरूरी है कि आपको अगले खेल में अपने गलतियों को कैसे सुधारना है और ये तभी हो सकता है जब आप शिक्षित हो और खेल के तकनिकों को भली भांती जानते हो। आपने पिछले मैच में क्या शॉट खेला था, क्या सही किया था, क्या गलत किया था? यह सब देखकर ही अगले मैच की रणनीति तैयार होती है।

जाहिर तौर पर अब देश में खेल की न केवल परिभाषा बल्कि खेलों के प्रति लोगों नजरिया भी बदल रहा है। नतीजतन अब खेल के क्षेत्र में जाने के लिए होड़ लगी रहती है। पिछले कुछ वर्षों से जिस तरह खेल प्रतिभाएं सामने आ रही हैं वो दिन दूर नहीं होगा जब भारत मुख्य स्पोर्टिंग नेशन के नाम से जाना जाएगा।

 

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

4 + fourteen =