ये हैं एसएसपीएफ वालीबॉल नेशनल कैंप में तराशे गए 4 होनहार वालीबॉल खिलाड़ी

 

मौका था उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्कूल स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन के नेशनल वालीबॉल कैंप के आयोजन का। स्कूल्स इंडिया कप के तीसरे सीजन से पहले वालीबॉल का यह पहला नेशनल कैंप का आयोजन था। कैंप में कुल 9 राज्यों के 35 बच्चों ने शिकरत की। इस नेशनल कैंप के लिए जब हमने रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में कदम रखा तब वहां कि तैयारियों को देखकर मन और खुश हो गया।

600 एकड़ में फैली एक सामराज्य जैसे जौहार यूनिवर्सिटी का नजारा देखते ही बन रहा था। किसी भी खेल में बच्चों के प्रैक्टिस करने के लिए यह जगह एकदम पिट है। फिर चाहे वो खेल फुटबॉल हो हॉकी हो, क्रिकेट हो या फिर अपना वालीबॉल जिसके लिए 35 युवा खिलाड़ियों ने वहां शिरकत की।

जाहिर तौर कैंप के लिए चयनित हुए 9 राज्यों के खिलाड़ियों का चयन उनके पिछले साल स्कूल्स इंडिया कप में किए गए प्रदर्शन के आधार पर किया गया, लेकिन इस साल  कैंप में भाग लेने के लिए उन बच्चों के बीच उत्साह दोगुना देखा।

इन चार खिलाड़ी कैंप में बनकर उभरे सितारे।

सबसे पहले बात कर लेते है पिछले साल के स्कूल्स इंडिया कप में वालीबॉल की चैम्पियन टीम हरियाणा की। इस टीम से कैंप में 4 बच्चों आए थे जिनमें लवि कुमार के खेल और तकनिक की सभी कोच ने काफी प्रशंसा की। टीम में सेटर की भुमिका निभाने वाले जट लवि कुमार का कद जितना लंबा था उतने ही उनके इरादे। हरियाणा के करनाल जिल के रहने वाले लवि पिछले 3 साल से वालीबॉल में लगे है और वालीबॉल को ही अपने करियर के तौर पर

लैड ओम – महाराष्ट्रा के अहमदनगर के रहने वाले ओम के नाम में भले ही लैड लगा हो, लैड (यानि की छोटा बच्चा) लेकिन उनका कद उनके नाम के विपरीत था। ओम अपने टीम के सबसे फुर्तीले खिलाड़ियों में से एक हैं और उन 35 खिलाड़ियों की लिस्ट में उन्हें उभरते खिलाड़ी का सम्मान दिया गया। लैड ओम की उपलब्धि की बात करें तो स्कूल्स इंडिया कप के दूसरे सीजन में उन्होंने सेमीफाइनल मुकाबले में हरियाणा के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया था। टीम में लिबेरो की भूमिका निभाने वाले ओम हमेशा से अपने टीम के लिए प्लस प्वाइंट साबित हुए है।

 

मोहम्मद हाशिम – उत्तर प्रदेश के मुस्लिम कॉलेज के छात्र मोहम्मद हाशिम स्कूल में लिबेरो की भूमिका निभाते है। प्रैक्टिस के दौरान जब वो कोर्ट में उतरते थे तो उनकी फुर्ती देखते ही बनती थी। मोहम्मद हाशिम का कहना है कि स्कूल के टीम में उन्हें वो सिखने का मौका नहीं मिला जो उन्हें इस कैंप के जरिए मिला है। उनके खेल में पहले से काफी सुधार हुआ यह कहना सिर्फ उनका नहीं बल्कि कोचों के भी है।

 

7 दिन तक चलने वाले नेशनल कैंप में बेस्ट अटैकर चुने गए हरिद्वार उत्तराखंड के ऋतिक वीर सैनी ने बताया कि मौजूदा समय में हमारे लिए 12वीं की पढाई और खेल को साथ में लेकर चलना मुश्किल है। मैं खुशनसीब हूं कि मेरे स्कूल प्रबंधन और पैंरेट ने इस कैंप की अहमियत को समझा। इस कैंप में खेल की तकनिकों के अलावा कई तरह के अभ्यास कराए गए जिनके फायदे से हम अंजान थे। ऋतिक ने इस कैंप में आकर अपने फुटवर्क पर भी खूब काम किया है जो आगे उन्हें काफी मदद करेगा।

कैंप भले एक हफ्ते का हो, लेकिन बच्चों के साथ उन्हें प्रैक्टिस करता देख मुझे ये समझ आ गया कि भारत जो कि धीरे धीरे एक स्पोर्टिंग नेशन में तबदील हो रहा है वो किसी एक खेल में आगे बढ़ने का मोहताज नहीं है। मौका मिलने पर वो क्रिकेट फुटबॉल, एथलेटिक्स से परे वालीबॉल, बास्केटबॉल जैसे टीम गेम में भी बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है।

 

 

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